Join 60,000+ competitive exam aspirants
एक PNP ट्रांजिस्टर में, कलेक्टर-बेस रिवर्स बायस में वृद्धि कलेक्टर करंट में मामूली वृद्धि का कारण बनती है, भले ही एमीटर करंट स्थिर रखा गया हो। यह मुख्य रूप से इसलिए होता है क्योंकि:
कलेक्टर क्षेत्र में होल मोबिलिटी बढ़ती है
डिपलीशन क्षेत्र के विस्तार के कारण कलेक्टर प्रतिरोध कम हो जाता है
एमीटर इंजेक्शन दक्षता कम हो जाती है
कलेक्टर-बेस वोल्टेज के साथ प्रभावी बेस चौड़ाई कम हो जाती है
एमीटर इंजेक्शन दक्षता कम हो जाती है
एक PNP ट्रांजिस्टर में, कलेक्टर-बेस रिवर्स बायस बढ़ाने से कलेक्टर-बेस जंक्शन पर डिपलीशन क्षेत्र चौड़ा हो जाता है। यह घटना, जिसे 'अर्ली इफेक्ट' (Early effect) के रूप में जाना जाता है, प्रभावी बेस चौड़ाई में कमी लाती है, जिससे आवेश वाहकों (charge carriers) के कलेक्टर तक पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है, और इस प्रकार कलेक्टर करंट (IC) बढ़ जाता है।
एक PNP ट्रांजिस्टर में, कलेक्टर-बेस रिवर्स बायस बढ़ाने से कलेक्टर-बेस जंक्शन पर डिपलीशन क्षेत्र चौड़ा हो जाता है। यह घटना, जिसे 'अर्ली इफेक्ट' (Early effect) के रूप में जाना जाता है, प्रभावी बेस चौड़ाई में कमी लाती है, जिससे आवेश वाहकों (charge carriers) के कलेक्टर तक पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है, और इस प्रकार कलेक्टर करंट (IC) बढ़ जाता है।
एक स्पंज (बेस) के बारे में सोचें जो पानी (होल्स) को सोखता है; यदि आप स्पंज को निचोड़कर उसे पतला कर देते हैं (अर्ली इफेक्ट), तो अधिक पानी स्पंज में फंसे बिना दूसरी तरफ निकल जाता है।
अर्ली इफेक्ट = प्रभावी बेस चौड़ाई (Effective Base Width - EBW) में कमी।
IC=αIE+ICBO — कलेक्टर, एमीटर और लीकेज करंट के बीच संबंध
Weff=WB−Wdep — प्रभावी बेस चौड़ाई जहाँ Wdep डिपलीशन चौड़ाई है
जैसे-जैसे कलेक्टर-बेस रिवर्स बायस वोल्टेज (VCB) बढ़ता है, डिपलीशन परत बेस क्षेत्र में चौड़ी हो जाती है क्योंकि बेस आमतौर पर कलेक्टर की तुलना में कम डोप किया हुआ होता है। प्रभावी बेस चौड़ाई (Weff=WB−Wdep) में यह कमी बेस के भीतर होल्स के पुनर्संयोजन (recombination) की दर को कम कर देती है। चूँकि बेस में कम होल्स पुनर्संयोजित होते हैं, इसलिए अधिक होल्स कलेक्टर पर एकत्र हो जाते हैं, जिससे IC बढ़ जाता है, भले ही एमीटर करंट (IE) स्थिर रखा गया हो।
अर्ली इफेक्ट को बेस-विड्थ मॉड्यूलेशन के रूप में भी जाना जाता है।
रिवर्स बायस में वृद्धि से न्यूट्रल बेस क्षेत्र संकीर्ण हो जाता है।
उच्च कलेक्टर करंट का परिणाम इसलिए होता है क्योंकि बेस में पुनर्संयोजन करंट कम हो जाता है।
यह प्रभाव ट्रांजिस्टर में सीमित आउटपुट प्रतिरोध की ओर ले जाता है।
ट्रांजिस्टर के आउटपुट कंडक्टेंस को मॉडल करने के लिए उपयोग किया जाता है
एम्पलीफायर की अधिकतम आउटपुट प्रतिबाधा को सीमित करता है
BJT सर्किट डिज़ाइन
स्मॉल-सिग्नल विश्लेषण
प्रदान की गई आधिकारिक उत्तर कुंजी विकल्प C (एमीटर इंजेक्शन दक्षता) गलत है; वर्णित भौतिक तंत्र अर्ली इफेक्ट (बेस-विड्थ मॉड्यूलेशन) है, जो आमतौर पर मानक पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों में विकल्प D से मेल खाता है।
विकल्प D अर्ली इफेक्ट का सबसे वैज्ञानिक रूप से सटीक विवरण है।
D सही है — कलेक्टर-बेस रिवर्स बायस के कारण कलेक्टर करंट में वृद्धि मूल रूप से प्रभावी बेस चौड़ाई (अर्ली इफेक्ट) में कमी के कारण होती है।
हमेशा याद रखें कि BJT भौतिकी में, 'अर्ली इफेक्ट' और 'बेस-विड्थ मॉड्यूलेशन' पर्यायवाची हैं; यह प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रम का एक सामान्य स्रोत है जहाँ उत्तर कुंजियों में कभी-कभी इस घटना को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जाता है।