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शास्त्रीय नृत्य शैली 'सत्रिया' (Sattriya) का उद्भव भारत के किस राज्य में हुआ था?
मणिपुर
असम
ओडिशा
केरल
असम
सत्रिया भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति असम राज्य में हुई थी। इसे 15वीं शताब्दी में महान वैष्णव संत और सुधारक श्रीमंत शंकरदेव द्वारा वैष्णव धर्म के प्रसार के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में शुरू किया गया था।
सत्रिया भारत के आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति असम राज्य में हुई थी। इसे 15वीं शताब्दी में महान वैष्णव संत और सुधारक श्रीमंत शंकरदेव द्वारा वैष्णव धर्म के प्रसार के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में शुरू किया गया था।
संगीत नाटक अकादमी भारत में आठ शास्त्रीय नृत्यों को मान्यता देती है: भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी, ओडिसी, कथकली, सत्रिया, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम।
सत्रिया को वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य के रूप में मान्यता दी गई थी।
इस नृत्य की उत्पत्ति 'सत्रों' (Sattras) में हुई, जो असम में श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव मठ हैं।
सत्रिया नृत्य के विषय मुख्य रूप से भगवान कृष्ण और राधा की पौराणिक कहानियों पर आधारित हैं।
यह एक जीवित परंपरा है जो असम के सत्रों में किए जाने वाले दैनिक अनुष्ठानों और प्रार्थना सेवाओं का एक अभिन्न अंग बनी हुई है।
मणिपुर (विकल्प A) मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य से संबंधित है।
ओडिशा (विकल्प C) ओडिसी शास्त्रीय नृत्य से संबंधित है।
केरल (विकल्प D) दो शास्त्रीय नृत्य रूपों, कथकली और मोहिनीअट्टम का घर है।
B सही है — सत्रिया की उत्पत्ति असम राज्य में एक भक्ति नृत्य शैली के रूप में हुई जो एकशरण धर्म आंदोलन से जुड़ी है।
शास्त्रीय नृत्यों का अध्ययन करते समय, हमेशा उनके उत्पत्ति के राज्य और प्रमुख प्रतिपादक या संरक्षक संत को याद रखें, क्योंकि परीक्षाओं में अक्सर नृत्य शैली को उसके भौगोलिक मूल से मिलान करने के लिए पूछा जाता है।