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बोर होल की संख्या और उनका विन्यास (disposition) _______ के आधार पर अलग-अलग होता है।
आस-पास का वातावरण (Surroundings)
स्तर (Strata)
उपमृदा स्थिति (Subsoil condition)
भूजल (Ground water)
उपमृदा स्थिति (Subsoil condition)
भू-तकनीकी साइट अन्वेषण (geotechnical site investigation) के दौरान बोर होल की संख्या और उनका विन्यास मुख्य रूप से उपमृदा स्थितियों (subsoil conditions) की परिवर्तनशीलता और जटिलता द्वारा निर्धारित किया जाता है। चूंकि उपसतह प्रोफ़ाइल पहले से ज्ञात नहीं होती है, इसलिए भूगर्भीय स्तरिकी (geological stratigraphy), मिट्टी/चट्टान के गुणों और भूजल स्तर को सटीक रूप से परिभाषित करने के लिए बोरिंग के अंतर (spacing) और गहराई को समायोजित किया जाता है।
भू-तकनीकी साइट अन्वेषण (geotechnical site investigation) के दौरान बोर होल की संख्या और उनका विन्यास मुख्य रूप से उपमृदा स्थितियों (subsoil conditions) की परिवर्तनशीलता और जटिलता द्वारा निर्धारित किया जाता है। चूंकि उपसतह प्रोफ़ाइल पहले से ज्ञात नहीं होती है, इसलिए भूगर्भीय स्तरिकी (geological stratigraphy), मिट्टी/चट्टान के गुणों और भूजल स्तर को सटीक रूप से परिभाषित करने के लिए बोरिंग के अंतर (spacing) और गहराई को समायोजित किया जाता है।
N=f(V,A,S) — जहाँ N बोरिंग की संख्या है, V मृदा परिवर्तनशीलता है, A क्षेत्र है, और S संरचनात्मक भार तीव्रता है
साइट अन्वेषण का उद्देश्य एक प्रतिनिधि मृदा प्रोफ़ाइल प्राप्त करना है। अत्यधिक परिवर्तनशील उपमृदा या जटिल स्तरिकी वाले क्षेत्रों में, पार्श्व और ऊर्ध्वाधर विजातीयता (heterogeneities) को पकड़ने के लिए बोर होल के सघन ग्रिड की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, एक समान मृदा निक्षेपों में कम बोर होल पर्याप्त होते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि संरचनात्मक डिजाइन के लिए निर्धारित भू-तकनीकी पैरामीटर, जैसे कि वहन क्षमता (bearing capacity) या कतरनी शक्ति (shear strength), विश्वसनीय हैं।
IS:1892 साइट अन्वेषण और बोर होल की गहराई के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
विस्तृत अन्वेषण के लिए बोर होल का अंतर आमतौर पर 10 मीटर से 30 मीटर तक होता है।
यदि साइट का क्षेत्र बड़ा है, तो पूर्ण कवरेज सुनिश्चित करने के लिए विन्यास (लेआउट) को व्यवस्थित (staggered) रखा जाना चाहिए।
अन्वेषण की गहराई नींव के भार के प्रभाव क्षेत्र (zone of influence) द्वारा निर्धारित की जाती है।
नींव के धंसने या विफल होने के जोखिम को कम करता है।
अत्यधिक या अपर्याप्त अन्वेषण से बचकर परियोजना की लागत को अनुकूलित करता है।
जटिल साइटों के लिए अन्वेषण की लागत और समय में वृद्धि।
ग्रिड लेआउट के बावजूद स्थानीयकृत मृदा विसंगतियों के छूटने की संभावना।
बहुमंजिला इमारतों के लिए नींव का डिजाइन।
नागरिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में ढलान स्थिरता विश्लेषण।
अत्यधिक परिवर्तनशील मृदा में, नरम या संपीड़ित सामग्री की परतों को रेखांकित करने के लिए बोरिंग की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
विकल्प B (स्तर/Strata) उपमृदा स्थितियों का एक घटक है, लेकिन 'उपमृदा स्थिति' (subsoil condition) व्यापक और अधिक सटीक इंजीनियरिंग शब्द है।
भूजल (विकल्प D) नमूना लेने की विधि को प्रभावित करता है, लेकिन मुख्य रूप से ग्रिड लेआउट की आवृत्ति को नहीं।
C सही है — बोर होल की संख्या और वितरण उपमृदा स्थितियों की परिवर्तनशीलता पर निर्भर करता है ताकि सटीक साइट प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
हमेशा याद रखें कि भू-तकनीकी डिजाइन एक पुनरावृत्त प्रक्रिया है; यदि प्रारंभिक बोर होल अप्रत्याशित परिवर्तनशीलता का पता लगाते हैं, तो नींव के डिजाइन को अंतिम रूप देने से पहले आपको बाद की बोरिंग की संख्या बढ़ानी होगी।