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नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की मेकेदातु परियोजना को रोकने के लिए किस राज्य की याचिका खारिज कर दी?
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तमिलनाडु
नवंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वोयर (संतुलन जलाशय) परियोजना को चुनौती देने वाली तमिलनाडु की याचिका को खारिज कर दिया।
मेकेदातु परियोजना कावेरी नदी पर जल-बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। तमिलनाडु ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) द्वारा कर्नाटक को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की अनुमति देने को चुनौती दी थी, जिसका आधार अपने किसानों के लिए पानी के प्रवाह में कमी की चिंता थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को समय से पहले (premature) करार दिया और जोर दिया कि तकनीकी जल-बंटवारे और व्यवहार्यता अध्ययन के फैसले कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) जैसे विशेषज्ञ निकायों द्वारा लिए जाने चाहिए। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि कर्नाटक कानूनी रूप से पिछले न्यायिक निर्देशों के अनुसार तमिलनाडु को पानी छोड़ने के लिए बाध्य है।
कावेरी जल विवाद 'अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956' द्वारा शासित होता है, जो केंद्र सरकार को न्यायनिर्णयन के लिए न्यायाधिकरण स्थापित करने का अधिकार देता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल से संबंधित विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए रूपरेखा प्रदान करता है, जो ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को बाहर रखता है, हालांकि अदालत विशिष्ट कानूनी प्रावधानों के तहत एक अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीख: 13 नवंबर, 2025
प्रस्तावित परियोजना का स्थान: कनकपुरा, बेंगलुरु दक्षिण जिला (कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा)
संबंधित प्राथमिक नियामक निकाय: कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC)
न्यायिक पीठ के प्रमुख: भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़
A सही है — सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ तमिलनाडु की याचिका को यह मानते हुए खारिज कर दिया कि यह चुनौती समय से पहले दी गई थी।
याद रखें कि 'मेकेदातु' का संबंध कावेरी नदी प्रणाली से है; इसे बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों के लिए एक 'बैलेंसिंग रिज़र्वोयर' परियोजना के रूप में याद रखें, जो कर्नाटक द्वारा दी गई प्राथमिक दलील है।