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भारत का पहला पीड़ित अधिकार केंद्र (Victims Rights Centre) कहाँ उद्घाटन किया गया था?
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भारत के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन अपराध के पीड़ितों को कानूनी सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए पटना, बिहार में किया गया था।
पटना में पीड़ित अधिकार केंद्र की स्थापना यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि अपराधों के शिकार लोगों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को व्यापक कानूनी सहायता और परामर्श प्राप्त हो। इस पहल का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली में उस अंतर को पाटना है जहाँ ध्यान अक्सर आरोपी पर होता है, न कि पीड़ितों के अधिकारों पर। यह न्यायिक कार्यवाही में पीड़ित की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित सुविधा के रूप में कार्य करता है। यह केंद्र भारत में पीड़ित-केंद्रित न्याय सुधारों की दिशा में एक सक्रिय कदम है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A राज्य को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का आदेश देता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को न्याय पाने के अवसर से वंचित न किया जाए। यह राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) पूरे भारत में इन कानूनी सहायता कार्यक्रमों को लागू करने के लिए जिम्मेदार प्राथमिक निकाय है।
स्थान: पटना, बिहार
प्राथमिक लक्ष्य: अपराध के पीड़ितों को कानूनी सहायता और पुनर्वास प्रदान करना
लक्षित समूह: समाज के कमजोर वर्ग जिनमें महिलाएं और नाबालिग शामिल हैं
केंद्रित क्षेत्र: पीड़ित-केंद्रित आपराधिक न्याय सुधार
C सही है — भारत के पहले पीड़ित अधिकार केंद्र का उद्घाटन पटना में किया गया था ताकि अपराध के पीड़ितों को आवश्यक कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा सके।
याद रखें कि 'P' से पटना, 'पीड़ितों' (Victims) के अधिकार केंद्र का नेतृत्व करने वाला पहला शहर है, जो न्यायिक प्रक्रिया में 'वादी' (Plaintiff) या 'याचिकाकर्ता' (Petitioner) की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।