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OSI मॉडल की कौन सी परत डेटा पैकेट की तार्किक एड्रेसिंग (logical addressing) और रूटिंग के लिए जिम्मेदार है?
डेटा लिंक लेयर
नेटवर्क लेयर
ट्रांसपोर्ट लेयर
सेशन लेयर
नेटवर्क लेयर
OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर (लेयर 3) पैकेट फॉरवर्डिंग, तार्किक एड्रेसिंग और रूटिंग के लिए जिम्मेदार है। यह रूटिंग एल्गोरिदम का उपयोग करके नेटवर्क के माध्यम से सबसे अच्छा भौतिक मार्ग चुनकर यह सुनिश्चित करती है कि डेटा अपने गंतव्य तक पहुँच जाए।
ISO/IEC 7498-1:1994 (OSI बेसिक रेफरेंस मॉडल)
OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर (लेयर 3) पैकेट फॉरवर्डिंग, तार्किक एड्रेसिंग और रूटिंग के लिए जिम्मेदार है। यह रूटिंग एल्गोरिदम का उपयोग करके नेटवर्क के माध्यम से सबसे अच्छा भौतिक मार्ग चुनकर यह सुनिश्चित करती है कि डेटा अपने गंतव्य तक पहुँच जाए।
Throughput=Time TakenTotal Packets Delivered
Network Delay=Propagation Delay+Transmission Delay+Queuing Delay+Processing Delay
नेटवर्क लेयर ट्रांसपोर्ट लेयर के सेगमेंट को पैकेट में एनकैप्सुलेट (encapsulate) करती है। यह वैश्विक स्तर पर स्रोत और गंतव्य नोड्स की पहचान करने के लिए तार्किक एड्रेसिंग योजनाओं, जैसे कि IPv4 या IPv6, का उपयोग करती है। राउटर इस लेयर पर काम करते हैं और गंतव्य पतों के आधार पर डेटा के लिए अगला हॉप (hop) निर्धारित करने हेतु रूटिंग टेबल बनाए रखते हैं।
तार्किक एड्रेसिंग विषम नेटवर्कों (heterogeneous networks) में संचार को सक्षम बनाती है।
राउटर और लेयर-3 स्विच इस लेयर पर काम करने वाले प्राथमिक उपकरण हैं।
प्रमुख प्रोटोकॉल में IP, ICMP, ARP (अक्सर लेयर 2.5 में वर्गीकृत), और रूटिंग प्रोटोकॉल जैसे OSPF और BGP शामिल हैं।
अधिकतम ट्रांसमिशन यूनिट (MTU) सीमाओं से मेल खाने के लिए पैकेटों का विखंडन (fragmentation) और पुनर्संयोजन यहाँ किया जाता है।
विभिन्न नेटवर्क आर्किटेक्चर की इंटरनेटवर्किंग की अनुमति देता है।
एंड-टू-एंड वैश्विक एड्रेसिंग प्रदान करता है।
कुशल कंजेशन कंट्रोल (congestion control) और पथ निर्धारण।
हेडर प्रोसेसिंग और रूटिंग निर्णयों के कारण लेटेंसी (latency) में वृद्धि।
बड़े पैमाने पर वैश्विक रूटिंग टेबल के प्रबंधन में जटिलता।
इंटरनेट ट्रैफ़िक की रूटिंग।
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPNs) का निर्माण।
फायरवॉल का उपयोग करके डेटा पैकेट फ़िल्टरिंग।
विकल्प A (डेटा लिंक लेयर) फ्रेम स्तर पर भौतिक एड्रेसिंग (MAC पते) और त्रुटि पहचान को संभालती है।
विकल्प C (ट्रांसपोर्ट लेयर) पोर्ट का उपयोग करके एंड-टू-एंड संचार, फ्लो कंट्रोल और त्रुटि रिकवरी सुनिश्चित करती है।
विकल्प D (सेशन लेयर) एप्लिकेशन के बीच डायलॉग कंट्रोल और सिंक्रोनाइज़ेशन का प्रबंधन करती है।
B सही है — नेटवर्क लेयर तार्किक एड्रेसिंग और रूटिंग के लिए नामित लेयर है।
परीक्षाओं में, क्रम (एप्लिकेशन से फिजिकल) को याद रखने के लिए 'All People Seem To Need Data Processing' मेमोनिक का उपयोग करें। लेयर 3 के लिए, 'IP पते', 'राउटर' और 'पैकेट' जैसे कीवर्ड पर ध्यान दें।