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निम्नलिखित में से किसे बुद्ध की शिक्षाओं वाला प्राथमिक पवित्र ग्रंथ माना जाता है?
त्रिपिटक
वेद
अंग
उपनिषद
त्रिपिटक
त्रिपिटक, जिसे पाली कैनन (Pali Canon) के रूप में भी जाना जाता है, बुद्ध की शिक्षाओं के आधिकारिक संग्रह के रूप में कार्य करता है। इसमें तीन मुख्य पिटक शामिल हैं: विनय पिटक (मठवासी अनुशासन), सुत्त पिटक (बुद्ध के उपदेश), और अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विश्लेषण)।
त्रिपिटक, जिसे पाली कैनन (Pali Canon) के रूप में भी जाना जाता है, बुद्ध की शिक्षाओं के आधिकारिक संग्रह के रूप में कार्य करता है। इसमें तीन मुख्य पिटक शामिल हैं: विनय पिटक (मठवासी अनुशासन), सुत्त पिटक (बुद्ध के उपदेश), और अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विश्लेषण)।
प्रथम बौद्ध संगीति बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद राजा अजातशत्रु के संरक्षण में राजगृह में आयोजित की गई थी, ताकि धम्म और विनय को संहिताबद्ध किया जा सके।
त्रिपिटक पाली भाषा में लिखा गया था, जो उस समय आम लोगों की बोलचाल की भाषा थी।
विनय पिटक में भिक्षुओं और भिक्षुणियों (संघ) के लिए आचार संहिता के नियम हैं।
सुत्त पिटक में गौतम बुद्ध के वास्तविक उपदेश और संवाद शामिल हैं।
अभिधम्म पिटक शिक्षाओं का व्यवस्थित दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रदान करता है।
पाली भाषा में 'त्रिपिटक' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'तीन टोकरियाँ' है।
वेद हिंदू धर्म के सबसे पुराने पवित्र ग्रंथ हैं, न कि बौद्ध धर्म के।
अंग जैन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथ (आगम साहित्य) हैं।
उपनिषद वेदों का अंतिम भाग बनाने वाले दार्शनिक ग्रंथ हैं।
A सही है — त्रिपिटक बौद्ध धर्मग्रंथों का आधारभूत संग्रह है जिसमें गौतम बुद्ध की मुख्य शिक्षाएँ निहित हैं।
प्राचीन इतिहास का अध्ययन करते समय, हमेशा बौद्ध त्रिपिटक की तुलना जैन अंगों से करें, क्योंकि UPSC और राज्य PSC परीक्षाएँ अक्सर मिलान वाले प्रश्नों में इन शब्दों को आपस में बदल देती हैं।