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अत्यधिक खारे तटीय वातावरण में लोहे की संरचनाओं को जंग लगने से बचाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी विधि सबसे प्रभावी है?
लोहे की सतह पर पेंट करना
गैल्वेनाइजेशन (जस्तीकरण)
साधारण तेल लगाना
नमी वाले कक्ष में भंडारण
गैल्वेनाइजेशन (जस्तीकरण)
गैल्वेनाइजेशन लोहे पर जिंक की एक परत चढ़ाता है, जो एक बलिदानी एनोड (sacrificial anode) के रूप में कार्य करती है और अंदरूनी लोहे को जंग से बचाती है।
गैल्वेनाइजेशन लोहे पर जिंक की एक परत चढ़ाता है, जो एक बलिदानी एनोड (sacrificial anode) के रूप में कार्य करती है और अंदरूनी लोहे को जंग से बचाती है।
यह एक अंगरक्षक (जिंक) को नियुक्त करने जैसा है जो सभी हमलों को खुद पर ले लेता है ताकि वीआईपी (लोहा) सुरक्षित रहे।
जिंक सेव्स आयरन (ZSI)।
Zn→Zn2++2e− — जिंक का ऑक्सीकरण (बलिदानी)
Fe→Fe2++2e− — लोहे का संक्षारण
जिंक, लोहे की तुलना में अधिक इलेक्ट्रो-पॉजिटिव होने के कारण, अधिमानतः ऑक्सीकृत होता है (Zn→Zn2++2e−)। मुक्त हुए इलेक्ट्रॉन लोहे की सतह पर प्रवाहित होते हैं, जो इसके ऑक्सीकरण (Fe→Fe2++2e−) को रोकते हैं और इस प्रकार जंग बनने से रोकते हैं, विशेष रूप से क्लोराइड युक्त समुद्री हवा में।
जिंक का इलेक्ट्रोड विभव लोहे की तुलना में अधिक ऋणात्मक होता है।
जिंक की कोटिंग अवरोधक सुरक्षा और बलिदानी सुरक्षा दोनों प्रदान करती है।
दीर्घकालिक सुरक्षा (10-20 वर्ष)।
अत्यधिक संक्षारक, खारे वातावरण में प्रभावी।
साधारण पेंटिंग की तुलना में प्रारंभिक लागत अधिक।
यदि कोटिंग क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो उजागर स्थान पर जंग शुरू हो सकती है।
समुद्री संरचनाएं, जहाज के पतवार, अपतटीय प्लेटफॉर्म।
पुल, स्टील के पानी की पाइपलाइन, ऑटोमोबाइल चेसिस।
| Feature | पेंटिंग | गैल्वेनाइजेशन |
|---|---|---|
सुरक्षा तंत्र | भौतिक अवरोध (पेंट) | बलिदानी एनोड (जिंक कोटिंग) |
मानक हॉट-डिप गैल्वेनाइजिंग में ~0.5 mm जिंक कोटिंग का उपयोग होता है।
विकल्प A (पेंटिंग) केवल जंग को धीमा करता है और नमकीन स्प्रे में जल्दी विफल हो सकता है।
B सही है — गैल्वेनाइजेशन बलिदानी सुरक्षा प्रदान करता है जो खारे परिस्थितियों में पेंटिंग से बेहतर प्रदर्शन करती है।
याद रखें कि कम (अधिक ऋणात्मक) मानक इलेक्ट्रोड विभव वाली धातु बलिदानी एनोड के रूप में कार्य करती है, इसलिए जिंक लोहे की रक्षा करता है।