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धातु विज्ञान (metallurgy) में सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
फेन प्लवन विधि (Froth Floatation process)
चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation)
निक्षालन (Leaching)
निस्तापन (Calcination)
फेन प्लवन विधि (Froth Floatation process)
फेन प्लवन विधि का उपयोग विभेदक आर्द्रता (differential wettability) के सिद्धांत के आधार पर सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में, अयस्क के कण तेल (चीड़ का तेल) द्वारा भीग जाते हैं और झाग के रूप में सतह पर आ जाते हैं, जबकि गैंग (अशुद्धियाँ) पानी द्वारा भीग जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं।
फेन प्लवन विधि का उपयोग विभेदक आर्द्रता (differential wettability) के सिद्धांत के आधार पर सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में, अयस्क के कण तेल (चीड़ का तेल) द्वारा भीग जाते हैं और झाग के रूप में सतह पर आ जाते हैं, जबकि गैंग (अशुद्धियाँ) पानी द्वारा भीग जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं।
धातु विज्ञान और रासायनिक प्रसंस्करण के सिद्धांत UPSC और RRB सामान्य विज्ञान पाठ्यक्रम के औद्योगिक रसायन विज्ञान अनुभाग के लिए आवश्यक आधार हैं, जिसमें अक्सर कॉपर, जिंक और लेड जैसी धातुओं के निष्कर्षण विधियों का परीक्षण किया जाता है।
फेन प्लवन विधि का उपयोग विशेष रूप से सल्फाइड अयस्कों जैसे गैलेना (PbS), सिनेबार (HgS), और जिंक ब्लेंड (ZnS) के लिए किया जाता है।
चीड़ का तेल झाग बनाने वाले (frother) के रूप में कार्य करता है, जबकि सोडियम एथिल जेन्थेस का उपयोग अक्सर अयस्क की गैर-आर्द्रता (non-wettability) बढ़ाने के लिए संग्राहक (collector) के रूप में किया जाता है।
सोडियम साइनाइड (NaCN) जैसे अवनमक (depressants) का उपयोग दो सल्फाइड अयस्कों को अलग करने के लिए किया जाता है ताकि एक को झाग बनाने से रोका जा सके।
चुंबकीय पृथक्करण का उपयोग तब किया जाता है जब अयस्क या अशुद्धियों में चुंबकीय गुण होते हैं, जैसे मैग्नेटाइट या हेमेटाइट के लिए।
निक्षालन एक रासायनिक प्रक्रिया है जहाँ अयस्क को उपयुक्त अभिकर्मक में घोला जाता है; इसका उपयोग मुख्य रूप से बॉक्साइट अयस्क के सांद्रण (बेयर प्रक्रिया) के लिए किया जाता है।
निस्तापन हवा की अनुपस्थिति में अयस्क को गर्म करने की प्रक्रिया है, जिसका उपयोग कार्बोनेट और जलयोजित अयस्कों के लिए किया जाता है, सांद्रण के लिए नहीं।
यह प्रक्रिया धातु सल्फाइड और गैंग कणों की भीगने की विशेषताओं में अंतर पर निर्भर करती है।
A सही है — फेन प्लवन विधि सल्फाइड अयस्कों के चीड़ के तेल द्वारा अधिमान्य रूप से भीगने (preferential wetting) का उपयोग करती है ताकि उन्हें हाइड्रोफिलिक गैंग कणों से अलग किया जा सके।
परीक्षा में, हमेशा फेन प्लवन को सल्फाइड अयस्कों से और चुंबकीय पृथक्करण को लौह अयस्कों (आयरन) से जोड़ें; यह अंतर RRB और SSC विज्ञान पत्रों में परीक्षकों द्वारा अक्सर बिछाया जाने वाला जाल है।