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निम्नलिखित में से किस राज्य को 'मोलासिस बेसिन' (Molassis basin) के रूप में भी जाना जाता है, जो नरम असंगठित निक्षेपों से बना है?
असम
मेघालय
त्रिपुरा
मिजोरम
मिजोरम
मिजोरम भूगर्भीय रूप से 'मोलासिस बेसिन' के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह समुद्री अवसादों द्वारा निर्मित नरम, असंगठित निक्षेपों से बना है। पूर्वोत्तर भारत के इस क्षेत्र की विशेषता सिनक्लिनल घाटियों और एंटीक्लिनल रिज (पहाड़ियों) की अनूठी स्थलाकृति है।
मिजोरम भूगर्भीय रूप से 'मोलासिस बेसिन' के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह समुद्री अवसादों द्वारा निर्मित नरम, असंगठित निक्षेपों से बना है। पूर्वोत्तर भारत के इस क्षेत्र की विशेषता सिनक्लिनल घाटियों और एंटीक्लिनल रिज (पहाड़ियों) की अनूठी स्थलाकृति है।
पूर्वोत्तर भारत का भूगर्भीय इतिहास: हिमालयी ओरोजेनी के दौरान निर्मित तृतीयक (Tertiary) तलछटी बेल्ट का हिस्सा, जो मुख्य रूप से सुरमा और टिपम समूह की चट्टानों से बना है।
मिजोरम भूगर्भीय रूप से इंडो-बर्मा रेंज का हिस्सा है।
‘मोलासिस’ शब्द उन तलछटी निक्षेपों को संदर्भित करता है जो पर्वत श्रृंखला के सामने एक बेसिन में जमा होते हैं।
मिट्टी की नरम संरचना के कारण यह क्षेत्र उच्च भूकंपीय गतिविधि के प्रति संवेदनशील है।
मिजोरम की तलछटी चट्टानें मुख्य रूप से तृतीयक काल (लगभग 2.6 से 66 मिलियन वर्ष पुरानी) की हैं।
असम मुख्य रूप से अपने जलोढ़ मैदानों और ब्रह्मपुत्र घाटी प्रणाली के लिए जाना जाता है।
त्रिपुरा का परिदृश्य भी पहाड़ी है, लेकिन मिजोरम हिमालयी भूगर्भीय विकास के संदर्भ में इस विशिष्ट बेसिन प्रकार का सबसे प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत करता है।
विकल्प B (मेघालय) एक पठार है जो मुख्य रूप से प्राचीन आर्कियन चट्टानों और बेसाल्टिक ट्रैप से बना है, जो तृतीयक तलछटी मोलासिस बेसिन से भिन्न है।
D सही है — मिजोरम को उसके नरम, असंगठित और भूगर्भीय रूप से युवा तलछटी निक्षेपों के कारण मोलासिस बेसिन के रूप में जाना जाता है।
इस अवधारणा को 'हिमालयी ओरोजेनी' (Himalayan Orogeny) के अध्ययन से जोड़ें—जिन भूगर्भीय बलों ने हिमालय का निर्माण किया, उन्हीं ने पूर्वोत्तर में निक्षेपण घाटियों का भी निर्माण किया।