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भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति राज्यसभा के लिए कितने सदस्यों को नामांकित कर सकते हैं?
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भारत के राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से 12 सदस्यों को राज्यसभा के लिए नामांकित करते हैं। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया से गुजरे बिना विधायी प्रक्रिया में योगदान दे सकें।
भारत के राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से 12 सदस्यों को राज्यसभा के लिए नामांकित करते हैं। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया से गुजरे बिना विधायी प्रक्रिया में योगदान दे सकें।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80(1)(a) और अनुच्छेद 80(3)।
नामांकित सदस्यों को निर्वाचित सदस्यों के समान ही अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, सिवाय इसके कि वे भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
ये 12 नामांकित सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में उनकी विशेषज्ञता के आधार पर चुने जाते हैं।
राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें से 238 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं, और 12 राष्ट्रपति द्वारा नामांकित किए जाते हैं।
नामांकन शक्ति को आयरिश संविधान के मॉडल से लिया गया है।
पूर्व में, राष्ट्रपति अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा के लिए एंग्लो-इंडियन समुदाय से भी 2 सदस्यों को नामांकित करते थे, लेकिन 104वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया था।
विकल्प 2 ऐतिहासिक रूप से लोकसभा के लिए प्रासंगिक था, जबकि 10 और 14 राज्यसभा नामांकन के संबंध में गलत आंकड़े हैं।
B सही है — भारत के राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा के लिए 12 सदस्यों को नामांकित करते हैं।
राज्यसभा का अध्ययन करते समय, हमेशा नामांकन शक्तियों और 104वें संशोधन के संबंध में लोकसभा के साथ इसका क्रॉस-रेफरेंस करें, क्योंकि परीक्षक अक्सर वर्तमान और निरस्त संवैधानिक प्रावधानों के बीच के अंतर का परीक्षण करते हैं।