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यदि A, B को विस्थापित करता है, और C, A को विस्थापित करता है, तो अभिक्रियाशीलता का क्रम है:
B > A > C
C > A > B
C > B > A
A > B > C
C > A > B
विस्थापन अभिक्रिया में, एक अधिक अभिक्रियाशील धातु अपनी लवण के घोल से कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित करती है। चूंकि C, A को विस्थापित करता है, इसलिए C, A से अधिक अभिक्रियाशील है, और चूंकि A, B को विस्थापित करता है, इसलिए A, B से अधिक अभिक्रियाशील है, जिसके परिणामस्वरूप अभिक्रियाशीलता का क्रम C > A > B होता है।
विस्थापन अभिक्रिया में, एक अधिक अभिक्रियाशील धातु अपनी लवण के घोल से कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित करती है। चूंकि C, A को विस्थापित करता है, इसलिए C, A से अधिक अभिक्रियाशील है, और चूंकि A, B को विस्थापित करता है, इसलिए A, B से अधिक अभिक्रियाशील है, जिसके परिणामस्वरूप अभिक्रियाशीलता का क्रम C > A > B होता है।
धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रृंखला NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम का एक मौलिक रासायनिक सिद्धांत है, जो धातुकर्म निष्कर्षण प्रक्रियाओं को समझने का आधार है।
एक विस्थापन अभिक्रिया धातु गतिविधि श्रृंखला के क्रम का पालन करती है।
पोटेशियम (K) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है, जबकि स्वर्ण (Au) मानक श्रृंखला में सबसे कम अभिक्रियाशील है।
हाइड्रोजन को अक्सर अधातुओं के लिए एक संदर्भ बिंदु के रूप में अभिक्रियाशीलता श्रृंखला में शामिल किया जाता है।
अभिक्रियाशीलता श्रृंखला धातुओं के मानक इलेक्ट्रोड विभव के आधार पर स्थापित की गई है।
श्रृंखला में हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएं इसे तनु अम्लों से विस्थापित कर सकती हैं।
विकल्प B सही है क्योंकि विस्थापन का पदानुक्रम पुष्टि करता है कि तीनों तत्वों में C सबसे अधिक अभिक्रियाशील और B सबसे कम अभिक्रियाशील है।
विकल्प A गलत है क्योंकि यह वास्तविक अभिक्रियाशीलता क्रम के विपरीत है।
B सही है — अभिक्रियाशीलता का क्रम एक तत्व की यौगिक से दूसरे को विस्थापित करने की क्षमता द्वारा निर्धारित किया जाता है, जिससे C > A > B स्थापित होता है।
यह अवधारणा रसायन विज्ञान में 'विद्युत रासायनिक श्रृंखला' और 'धातुओं का निष्कर्षण' अध्याय के साथ अक्सर पूछी जाती है, जो भूगोल में खनिज संसाधन दोहन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।