Join 60,000+ competitive exam aspirants
यदि किसी क्षेत्र का क्रॉस स्लोप 10 से 25% तक है, तो भू-भाग (terrain) को किस रूप में वर्गीकृत किया जाता है?
समतल (Plain)
रोलिंग (Rolling)
पहाड़ी (Mountainous)
खड़ी ढलान (Steep)
रोलिंग (Rolling)
राजमार्ग ज्यामितीय डिजाइन में, IRC (इंडियन रोड्स कांग्रेस) देश के क्रॉस स्लोप के आधार पर भू-भाग का वर्गीकरण करती है। 10% से 25% तक के क्रॉस स्लोप को 'रोलिंग' भू-भाग के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
राजमार्ग ज्यामितीय डिजाइन में, IRC (इंडियन रोड्स कांग्रेस) देश के क्रॉस स्लोप के आधार पर भू-भाग का वर्गीकरण करती है। 10% से 25% तक के क्रॉस स्लोप को 'रोलिंग' भू-भाग के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
S=HV×100 — क्रॉस स्लोप प्रतिशत S की गणना, जहाँ V ऊर्ध्वाधर वृद्धि है और H क्षैतिज दूरी है।
भू-भाग का वर्गीकरण सड़क के अलाइनमेंट के लंबवत प्राकृतिक जमीनी ढलान द्वारा निर्धारित किया जाता है। जैसे-जैसे क्रॉस स्लोप का प्रतिशत बढ़ता है, निर्माण की कठिनाई, अर्थवर्क और क्षैतिज/ऊर्ध्वाधर वक्रों की आवश्यकताएं बदल जाती हैं। रोलिंग भू-भाग समतल जमीन की तुलना में मध्यम ढलान प्रस्तुत करता है, जिसके लिए दृष्टि दूरी (sight distance) और वाहन की गति के लिए विशेष डिजाइन विचारों की आवश्यकता होती है।
समतल भू-भाग: क्रॉस स्लोप 10% तक।
रोलिंग भू-भाग: क्रॉस स्लोप 10% से 25%।
पहाड़ी भू-भाग: क्रॉस स्लोप 25% से 60%।
खड़ी ढलान वाला भू-भाग: क्रॉस स्लोप 60% से अधिक।
समान ज्यामितीय डिजाइन मानकों को सुनिश्चित करता है।
सड़क योजना के दौरान अर्थवर्क लागत का अनुकूलन।
वर्गीकरण औसत ढलान पर निर्भर करता है, जो एक ही परियोजना कॉरिडोर के भीतर काफी भिन्न हो सकता है।
राजमार्ग अलाइनमेंट का चयन।
सड़क निर्माण लागत का अनुमान।
अनुमेय ढलान और डिजाइन गति का निर्धारण।
यह वर्गीकरण सड़कों पर 'रूलिंग ग्रेडिएंट' और 'लिमिटिंग ग्रेडिएंट' निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
रोलिंग भू-भाग में अक्सर समतल भू-भाग की तुलना में अधिक वक्रता की आवश्यकता होती है, लेकिन पहाड़ी भू-भाग से कम।
B सही है — भारतीय सड़क मानकों के अनुसार 10% से 25% का क्रॉस स्लोप आधिकारिक तौर पर रोलिंग भू-भाग के रूप में नामित है।
10−25-60 नियम याद रखें: 10% (समतल), 10⁻²⁵% (रोलिंग), 25-60% (पहाड़ी), >60% (खड़ी ढलान)।