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यदि उत्पादकों की संख्या में वृद्धि होती है और शाकाहारियों की संख्या में कमी आती है, तो खाद्य श्रृंखला में क्या त्वरित परिणाम होने की संभावना है?
भोजन कम मिलने के कारण मांसाहारियों की आबादी घट जाएगी।
अतिचारण (overgrazing) के कारण उत्पादकों की संख्या घट जाएगी।
मांसाहारियों की आबादी बढ़ेगी।
अपघटकों (decomposers) की आबादी में अचानक गिरावट आएगी।
भोजन कम मिलने के कारण मांसाहारियों की आबादी घट जाएगी।
खाद्य श्रृंखला में, ऊर्जा और बायोमास उत्पादकों से शाकाहारियों और फिर मांसाहारियों की ओर प्रवाहित होते हैं। शाकाहारी आबादी में कमी से मांसाहारियों (द्वितीयक और तृतीयक उपभोक्ताओं) के लिए भोजन की भारी कमी हो जाती है, जिससे भूखमरी और ऊर्जा हस्तांतरण की कमी के कारण उनकी आबादी में तत्काल गिरावट आती है।
खाद्य श्रृंखला में, ऊर्जा और बायोमास उत्पादकों से शाकाहारियों और फिर मांसाहारियों की ओर प्रवाहित होते हैं। शाकाहारी आबादी में कमी से मांसाहारियों (द्वितीयक और तृतीयक उपभोक्ताओं) के लिए भोजन की भारी कमी हो जाती है, जिससे भूखमरी और ऊर्जा हस्तांतरण की कमी के कारण उनकी आबादी में तत्काल गिरावट आती है।
1942 में रेमंड लिंडेमैन द्वारा प्रस्तावित ऊर्जा हस्तांतरण का 10 प्रतिशत का नियम बताता है कि केवल 10% ऊर्जा ही अगले पोषी स्तर (trophic level) पर स्थानांतरित होती है, जिससे खाद्य श्रृंखला की स्थिरता पूरी तरह से शाकाहारियों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा हस्तांतरण 10 प्रतिशत के नियम का पालन करता है।
उत्पादक स्वपोषी के रूप में पोषी पिरामिड का आधार बनाते हैं।
मांसाहारी ऊर्जा की खपत के लिए पूरी तरह से शाकाहारियों पर निर्भर होते हैं।
मध्यवर्ती पोषी स्तर के ढहने से 'बॉटम-अप' या 'टॉप-डाउन' कैस्केडिंग प्रभाव (स्रावी प्रभाव) होता है।
विकल्प B गलत है क्योंकि शाकाहारियों में कमी के साथ उत्पादकों में वृद्धि से उत्पादकों का संचय होगा, कमी नहीं।
विकल्प C गलत है क्योंकि मांसाहारियों के लिए प्राथमिक भोजन स्रोत (शाकाहारी) समाप्त हो गया है, जिससे मांसाहारियों की वृद्धि होना असंभव है।
विकल्प D गलत है क्योंकि अपघटक सभी पोषी स्तरों के अपरद (detritus) पर निर्भर करते हैं, और आबादी में बदलाव से उनकी संख्या में तुरंत गिरावट आना आवश्यक नहीं है।
ट्रॉफिक कैस्केड (पोषी प्रपात) तब होता है जब एक स्तर में परिवर्तन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना को प्रभावित करता है।
A सही है — भोजन कम मिलने के कारण मांसाहारियों की आबादी घट जाएगी।
इस अवधारणा को UPSC और SSC परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाने वाले 'जैव-आवर्धन (Biomagnification)' और 'पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं' पर पर्यावरण और पारिस्थितिकी अध्यायों से जोड़ें, ताकि यह समझा जा सके कि प्रदूषक सांद्रता शीर्ष शिकारियों को कैसे प्रभावित करती है।