Join 60,000+ competitive exam aspirants
निम्नलिखित में से कौन सबसे कम अभिक्रियाशील (least reactive) है?
Na
K
Ca
Mg
Mg
मैग्नीशियम (Mg) दिए गए विकल्पों (Na, K, Ca, Mg) में सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है क्योंकि यह विद्युत रासायनिक श्रेणी (electrochemical series) में दूसरों से नीचे आता है। इन समूह 1 और समूह 2 की धातुओं की अभिक्रियाशीलता समूह में नीचे जाने पर और आवर्त में दाएं से बाएं जाने पर बढ़ती है; चूंकि Mg समूह 2 में है और इसकी आयनन ऊर्जा (ionization energy) क्षारीय धातुओं और कैल्शियम की तुलना में अधिक है, इसलिए यह इस समूह में सबसे कम अभिक्रियाशील है।
मैग्नीशियम (Mg) दिए गए विकल्पों (Na, K, Ca, Mg) में सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है क्योंकि यह विद्युत रासायनिक श्रेणी (electrochemical series) में दूसरों से नीचे आता है। इन समूह 1 और समूह 2 की धातुओं की अभिक्रियाशीलता समूह में नीचे जाने पर और आवर्त में दाएं से बाएं जाने पर बढ़ती है; चूंकि Mg समूह 2 में है और इसकी आयनन ऊर्जा (ionization energy) क्षारीय धातुओं और कैल्शियम की तुलना में अधिक है, इसलिए यह इस समूह में सबसे कम अभिक्रियाशील है।
अभिक्रियाशीलता को इस तरह समझें कि कोई व्यक्ति कितनी आसानी से अपनी चीजें 'दान' कर देता है; पोटेशियम उस उदार व्यक्ति की तरह है जो सब कुछ तुरंत दे देता है, जबकि मैग्नीशियम अधिक सतर्क है और अपने इलेक्ट्रॉनों को थोड़ी मजबूती से पकड़ कर रखता है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी याद रखें: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Ag > Au।
IE1∝परमाणु त्रिज्या1 — अभिक्रियाशीलता इलेक्ट्रॉन निकालने में आसानी (आयनन ऊर्जा) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
धातुओं की अभिक्रियाशीलता उनके धनायन (cations) बनाने के लिए इलेक्ट्रॉन खोने की क्षमता द्वारा निर्धारित की जाती है। क्षारीय धातुएं (K, Na) अपनी कम आयनन ऊर्जा के कारण अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं, और क्षारीय मृदा धातुओं में, अभिक्रियाशीलता परमाणु आकार के साथ बढ़ती है क्योंकि संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और अधिक आसानी से खो जाते हैं। मैग्नीशियम की परमाणु त्रिज्या छोटी होती है और इसका प्रभावी नाभिकीय आवेश सूची में दूसरों की तुलना में अधिक होता है, जिससे इसके इलेक्ट्रॉन अधिक मजबूती से बंधे होते हैं और उन्हें निकालना कठिन होता है।
परमाणु आकार और परिरक्षण (shielding) बढ़ने के कारण समूह में नीचे जाने पर धातुओं की अभिक्रियाशीलता बढ़ती है।
समान आवर्त में समूह 1 की धातुएं (क्षारीय) हमेशा समूह 2 की धातुओं (क्षारीय मृदा) से अधिक अभिक्रियाशील होती हैं।
पोटेशियम (K) इस सूची में सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है, उसके बाद सोडियम (Na), कैल्शियम (Ca), और अंत में मैग्नीशियम (Mg) है।
पोटेशियम या सोडियम जैसी अत्यधिक अभिक्रियाशील क्षारीय धातुओं की तुलना में प्रयोगशाला में मैग्नीशियम को संभालना कम खतरनाक है।
कम अभिक्रियाशील होने के कारण, मैग्नीशियम सूचीबद्ध अन्य तीन धातुओं की तुलना में पानी से उतनी तेजी से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करता है।
मैग्नीशियम का उपयोग एयरोस्पेस घटकों के लिए हल्के मिश्र धातुओं (alloys) में किया जाता है।
मैग्नीशियम का उपयोग जलने पर निकलने वाली चमकदार सफेद रोशनी के कारण फ्लेयर्स और आतिशबाजी में किया जाता है।
पोटेशियम और सोडियम को हवा/नमी के साथ प्रतिक्रिया से बचाने के लिए तेल में रखा जाना चाहिए।
मैग्नीशियम ठंडे पानी के साथ धीरे-धीरे लेकिन भाप (steam) के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है।
D सही है — मैग्नीशियम (Mg) दिए गए विकल्पों में सबसे कम अभिक्रियाशील है क्योंकि यह एक क्षारीय मृदा धातु है जिसकी आयनन ऊर्जा क्षारीय धातुओं (K, Na) और बड़ी क्षारीय मृदा धातु (Ca) की तुलना में अधिक है।
हमेशा याद रखें कि आवर्त सारणी में, धातुओं के लिए अभिक्रियाशीलता समूह में नीचे जाने पर और आवर्त में बाईं ओर जाने पर बढ़ती है।