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जयदेव की किस 12th-शताब्दी की कविता ने ओडिसी नृत्य शैली को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया?
अष्टपदी
गीता गोविंद
महाभारत
रामायण
गीता गोविंद
उन्मूलन (Elimination): जयदेव की पहचान सेन राजवंश के दरबारी कवि के रूप में करें, जो विशेष रूप से गीता गोविंद नामक गीतात्मक कृति के लिए जाने जाते हैं; अन्य विकल्प महाकाव्य या सामान्य नामकरण हैं।
लेखक: जयदेव, समय अवधि: 12वीं शताब्दी, कलात्मक संदर्भ: ओडिसी नृत्य शैली
Cultural Influence=∑i=1n(Literary Worki×Dance Impacti)
उन्मूलन (Elimination): जयदेव की पहचान सेन राजवंश के दरबारी कवि के रूप में करें, जो विशेष रूप से गीता गोविंद नामक गीतात्मक कृति के लिए जाने जाते हैं; अन्य विकल्प महाकाव्य या सामान्य नामकरण हैं।
'अष्टपदी' (कृति के भीतर कविताओं की संरचना) और 'गीता गोविंद' (पुस्तक का वास्तविक शीर्षक) के बीच भ्रमित होना।
लेखक का विश्लेषण करें
जयदेव 12वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध संस्कृत कवि थे, जो मुख्य रूप से राजा लक्ष्मण सेन के दरबार से जुड़े थे।
Author=Jayadeva (12th Century)
साहित्यिक कृति का मूल्यांकन करें
उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति, जो कृष्ण और राधा के बीच के संबंध का वर्णन करती है, का शीर्षक गीता गोविंद है।
Work=Gita Govinda
ओडिसी से संबंध
गीता गोविंद के गीत और विषय ओडिसी नृत्य के अभिनय (अभिव्यंजना) पहलुओं के आधार हैं।
Dance∝Gita Govinda
B सही है क्योंकि गीता गोविंद, जयदेव द्वारा रचित 12वीं सदी की उत्कृष्ट कृति है जो ओडिसी शास्त्रीय नृत्य परंपरा का गीतात्मक केंद्र है।
स्थिर सामान्य ज्ञान (Static GK) में, याद रखें कि कई शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ विशिष्ट साहित्यिक ग्रंथों से जुड़ी हैं; उदाहरण के लिए, कथकली अक्सर स्थानीय पौराणिक कथाओं का उपयोग करती है, जबकि ओडिसी 12वीं-16वीं शताब्दी के भक्ति साहित्य से अटूट रूप से जुड़ी हुई है।