Join 60,000+ competitive exam aspirants
वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण की प्रक्रिया में किस गैस का उपयोग किया जाता है?
ऑक्सीजन
नाइट्रोजन
हाइड्रोजन
हीलियम
हाइड्रोजन
वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकल जैसे उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त वसीय अम्लों के कार्बन-कार्बन द्विआबंधों पर हाइड्रोजन गैस का जुड़ना शामिल है। यह रासायनिक अपचयन प्रक्रिया तरल वनस्पति तेलों को वनस्पति घी जैसे ठोस या अर्ध-ठोस वसा में परिवर्तित करती है।
वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकल जैसे उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त वसीय अम्लों के कार्बन-कार्बन द्विआबंधों पर हाइड्रोजन गैस का जुड़ना शामिल है। यह रासायनिक अपचयन प्रक्रिया तरल वनस्पति तेलों को वनस्पति घी जैसे ठोस या अर्ध-ठोस वसा में परिवर्तित करती है।
इसे एक लचीली, ढीली श्रृंखला (असंतृप्त द्विआबंध) में अतिरिक्त बिल्डिंग ब्लॉक (हाइड्रोजन परमाणु) जोड़ने की तरह समझें ताकि इसे कठोर और स्थिर (संतृप्त एकल आबंध) बनाया जा सके, जिससे इसकी भौतिक अवस्था तरल से ठोस में बदल जाती है।
H2 हाइड्रोकार्बन को कठोर बनाता है (हाइड्रोजनीकरण तरल को ठोस में बदलता है)
R1CH=CHR2+H2xrightarrowNiR1CH2−CH2R2 — असंतृप्त वसीय अम्ल का उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनीकरण
यह प्रक्रिया एक उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनीकरण अभिक्रिया है जहाँ एक बारीक पिसे हुए धातु उत्प्रेरक (आमतौर पर लगभग 473 K पर निकल) की उपस्थिति में गर्म तरल तेल से हाइड्रोजन (H2) गैस प्रवाहित की जाती है। हाइड्रोजन परमाणु असंतृप्त द्विआबंधों (C=C) को तोड़ते हैं और कार्बन परमाणुओं से जुड़ जाते हैं, जिससे वे संतृप्त एकल आबंधों (C−C) में परिवर्तित हो जाते हैं। जैसे-जैसे संतृप्ति बढ़ती है, वसा का गलनांक बढ़ जाता है, जिससे तरल तेल ठोस या अर्ध-ठोस वसा में बदल जाता है।
वनस्पति तेल असंतृप्त वसा होते हैं जिनमें एक या अधिक कार्बन-कार्बन द्विआबंध होते हैं।
निकल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस (H2) जोड़ी जाती है।
यह प्रक्रिया तरल तेलों को वनस्पति घी जैसी ठोस या अर्ध-ठोस वसा में परिवर्तित करती है।
यह विकृतगंधिता के विरुद्ध तेलों की शेल्फ लाइफ और स्थिरता को बढ़ाती है।
तेलों की शेल्फ लाइफ और तापीय स्थिरता को बढ़ाता है।
सस्ते तरल तेलों को फैलने योग्य और ठोस खाना पकाने वाली वसा में परिवर्तित करता है।
आंशिक हाइड्रोजनीकरण से हानिकारक ट्रांस फैट का निर्माण हो सकता है।
ट्रांस फैट का अधिक सेवन हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाता है।
वनस्पति तेलों से वनस्पति घी का निर्माण।
बेकिंग के लिए मार्जरीन और व्यावसायिक शॉर्टनिंग का उत्पादन।
अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करने के लिए निकल, पैलेडियम या प्लेटिनम जैसे उत्प्रेरकों का उपयोग किया जाता है।
विकल्प A (ऑक्सीजन) वसा संतृप्ति के बजाय विकृतगंधिता और ऑक्सीकरण को बढ़ावा देता है।
विकल्प B (नाइट्रोजन) एक अक्रिय गैस है जिसका उपयोग मुख्य रूप से पैकेजिंग को फ्लश करने और ऑक्सीकरण को रोकने के लिए किया जाता है।
विकल्प C (हाइड्रोजन) वह प्रतिक्रियाशील गैस है जो विशेष रूप से हाइड्रोजनीकरण में उपभोग की जाती है।
C सही है — निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त वनस्पति तेलों में हाइड्रोजन गैस जोड़ी जाती है ताकि उन्हें संतृप्त वसा में परिवर्तित किया जा सके।
RRB JE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में, आसानी से अंक प्राप्त करने के लिए उपयोग की जाने वाली गैस (हाइड्रोजन) और आवश्यक उत्प्रेरक (निकल) दोनों को याद रखें।