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रेलवे और राजमार्ग के लिए अधिक सटीकता के साथ वक्र (curves) चिह्नित करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी विधि उपयोगी है?
A) Tacheometric method
B) Rankine’s method
C) Two theodolite method
D) All of the above
Rankine’s method
स्पर्शरेखीय कोणों (या विक्षेपण कोणों) की रैनकिन की विधि (Rankine's method) को रेलवे और राजमार्ग इंजीनियरिंग में साधारण वृत्ताकार वक्रों (simple circular curves) को चिह्नित करने के लिए सबसे सटीक और व्यावहारिक विधि माना जाता है। इसमें वक्र के बिंदु (Point of Curve - PC) पर स्थापित एक थियोडोलाइट का उपयोग विक्षेपण कोणों और जीवा की लंबाई (chord lengths) को मापकर वक्र पर बिंदुओं का पता लगाने के लिए एक शृंखला (chain) या स्टील टेप के साथ किया जाता है।
स्पर्शरेखीय कोणों (या विक्षेपण कोणों) की रैनकिन की विधि (Rankine's method) को रेलवे और राजमार्ग इंजीनियरिंग में साधारण वृत्ताकार वक्रों (simple circular curves) को चिह्नित करने के लिए सबसे सटीक और व्यावहारिक विधि माना जाता है। इसमें वक्र के बिंदु (Point of Curve - PC) पर स्थापित एक थियोडोलाइट का उपयोग विक्षेपण कोणों और जीवा की लंबाई (chord lengths) को मापकर वक्र पर बिंदुओं का पता लगाने के लिए एक शृंखला (chain) या स्टील टेप के साथ किया जाता है।
δn=R1718.9×Cn minutes — एक व्यक्तिगत जीवा के लिए स्पर्शरेखीय कोण
Δn=Δn−1+δn — बिंदु n के लिए कुल विक्षेपण कोण
Cn — nth जीवा की लंबाई, R — वक्र की त्रिज्या
यह विधि इस ज्यामितीय सिद्धांत पर आधारित है कि वृत्ताकार वक्र पर किसी भी बिंदु का विक्षेपण कोण, वक्र के केंद्र पर चाप (या लंबी जीवा) द्वारा अंतरित कोण के आधे के बराबर होता है। थियोडोलाइट का उपयोग करके प्रारंभिक स्पर्श रेखा से परिकलित स्पर्शरेखीय कोणों को घुमाकर और उस दिशा में संचयी जीवा लंबाई को मापकर, वक्र पर व्यक्तिगत बिंदुओं को सटीक रूप से स्थापित किया जाता है।
वक्र के बिंदु (PC) पर एक थियोडोलाइट और रैखिक माप के लिए एक शृंखला/टेप की आवश्यकता होती है।
रेलवे और राजमार्ग संरेखण में आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले लंबे-त्रिज्या वाले वक्रों के लिए अत्यधिक सटीक।
अंतिम बिंदु (स्पर्शरेखा का बिंदु) तक संचयी विक्षेपण कोण कुल विक्षेपण कोण (Δ/2) के आधे के बराबर होता है।
ऑफसेट विधियों की तुलना में उच्च सटीकता प्रदान करता है।
केवल वक्र के बिंदु (PC) पर एक उपकरण सेटअप की आवश्यकता होती है।
अंतिम बिंदु पर आसान क्षेत्र गणना और व्यवस्थित जाँच।
सभी जीवा दिशाओं में दृष्टि की स्पष्ट रेखा (line of sight) की आवश्यकता होती है।
यदि जीवा चेनिंग सटीक रूप से निष्पादित नहीं की जाती है, तो संचयी त्रुटियां आगे बढ़ सकती हैं।
हाई-स्पीड रेलवे लाइनों के लिए साधारण वृत्ताकार वक्र स्थापित करना।
उच्च परिशुद्धता की आवश्यकता वाले राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और शहरी सड़कों का संरेखण करना।
विकल्प A (Tacheometric method) तब उपयोगी होता है जब उबड़-खाबड़ या टूटी जमीन के कारण टेप/चेन से रैखिक माप कठिन होता है, लेकिन यह प्रत्यक्ष टेप माप की तुलना में अपेक्षाकृत कम परिशुद्धता प्रदान करता है।
विकल्प C (Two theodolite method) का उपयोग तब किया जाता है जब चेनिंग असंभव हो (जैसे, किसी नदी या दलदल के पार), लेकिन इसके लिए दो उपकरण सेटअप और दो पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होती है।
विकल्प D गलत है क्योंकि रैनकिन की विधि को गति, सटीकता और परिचालन दक्षता के इसके उत्कृष्ट संयोजन के कारण मानक रेलवे और राजमार्ग वक्र निर्धारण के लिए विशेष रूप से पसंद किया जाता है।
B सही है — स्पर्शरेखीय कोणों की रैनकिन विधि रेलवे और राजमार्ग वक्र संरेखण के लिए आवश्यक उच्च सटीकता और सुविधा प्रदान करने के लिए एक थियोडोलाइट और स्टील टेप का उपयोग करती है।
याद रखें कि साधारण वृत्ताकार वक्रों के लिए, स्पर्शरेखा बिंदु (PT) तक कुल विक्षेपण कोण हमेशा 2Δ के बराबर होता है, जहां Δ मुख्य स्पर्शरेखाओं के प्रतिच्छेदन का कोण है।