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निम्नलिखित में से कौन सा संगठन अगस्त 2024 में परीक्षण किए गए लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम (LRGB), 'गौरव' (GAURAV) के विकास के लिए जिम्मेदार है?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
भारतीय नौसेना (Indian Navy)
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
DRDO ने अगस्त 2024 में Su-30 MKI फाइटर जेट से स्वदेशी लॉन्ग-रेंज ग्लाइड बम (LRGB) 'गौरव' का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक किया।
'गौरव' LRGB का पहला उड़ान परीक्षण 13 अगस्त, 2024 को ओडिशा के तट पर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के पास किया गया था। यह हथियार 1,000 किलोग्राम वर्ग का एयर-लॉन्च ग्लाइड बम है जिसे 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अपनी सीमा को बढ़ाने के लिए पंखों का उपयोग करके, यह भारतीय वायु सेना के विमानों को दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों के दायरे से बाहर रहने की अनुमति देता है, जिससे परिचालन सुरक्षा और उत्तरजीविता बढ़ती है। यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति भारत की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जो आयातित सटीक-निर्देशित हथियारों (precision-guided munitions) पर निर्भरता को कम करती है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसकी स्थापना 1958 में तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (Technical Development Establishment) और तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (Directorate of Technical Development and Production) का रक्षा विज्ञान संगठन (Defence Science Organisation) के साथ विलय करके की गई थी।
उड़ान परीक्षण की तिथि: 13 अगस्त, 2024
ग्लाइड बम का वजन: 1,000 किलोग्राम (1 टन)
लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म: सुखोई Su-30 MKI फाइटर जेट
डिज़ाइन एजेंसी: रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद
C सही है — रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) वह अग्रणी एजेंसी है जिसने गौरव LRGB को डिज़ाइन और विकसित किया है।
याद रखें कि हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) DRDO की एक प्रमुख प्रयोगशाला है जो एवियोनिक्स और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम में विशेषज्ञ है, जो गौरव जैसे गाइडेड मिसाइलों और बमों के लिए आवश्यक हैं।