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निम्नलिखित में से किसने पंचवर्षीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण बाधा उत्पन्न की?
क्षेत्रीय विकास मानदंडों की व्यवस्थित अतिपूर्ति
नौकरशाही की अक्षमताएं, संसाधनों की कमी और अप्रत्याशित बाहरी झटके
निर्बाध एवं कुशल अंतर-सरकारी समन्वय
निजी क्षेत्र की महत्वाकांक्षाओं और नियोजित आर्थिक लक्ष्यों के बीच सही संरेखण
नौकरशाही की अक्षमताएं, संसाधनों की कमी और अप्रत्याशित बाहरी झटके
भारत की पंचवर्षीय योजनाएं, जो सोवियत प्रणाली पर आधारित थीं, को प्रशासनिक लालफीताशाही, पर्याप्त वित्तीय पूंजी की कमी, और युद्धों (1962, 1965, 1971) तथा गंभीर सूखे के कारण बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन कारकों ने सामूहिक रूप से लक्षित विकास दरों को प्राप्त करने से रोका और योजना अवकाश (Plan Holidays) जैसी दीर्घकालिक योजना को बीच में ही छोड़ने की स्थिति पैदा की।
भारत की पंचवर्षीय योजनाएं, जो सोवियत प्रणाली पर आधारित थीं, को प्रशासनिक लालफीताशाही, पर्याप्त वित्तीय पूंजी की कमी, और युद्धों (1962, 1965, 1971) तथा गंभीर सूखे के कारण बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन कारकों ने सामूहिक रूप से लक्षित विकास दरों को प्राप्त करने से रोका और योजना अवकाश (Plan Holidays) जैसी दीर्घकालिक योजना को बीच में ही छोड़ने की स्थिति पैदा की।
योजना आयोग की स्थापना 1950 में भारत सरकार के एक कार्यकारी संकल्प द्वारा की गई थी, जिसे बाद में 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जो संसाधन-आवंटन निकाय के बजाय एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है।
तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-1966) भारत-चीन युद्ध, भारत-पाक युद्ध और गंभीर सूखे के कारण सबसे बड़ी विफलता थी।
'योजना अवकाश' (1966-1969) की अवधारणा तीसरी पंचवर्षीय योजना की विफलता और संसाधनों की कमी के कारण शुरू हुई।
औद्योगिक-प्रधान योजनाओं की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में विफलता के बाद ही कृषि आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी गई।
नौकरशाही की अक्षमताएं अक्सर परियोजना मंजूरी और निधि वितरण में देरी के रूप में दिखाई देती थीं।
1973 के तेल संकट और 1991 के भुगतान संतुलन संकट जैसे बाहरी झटकों ने नियोजित राजकोषीय लक्ष्यों को काफी हद तक बदल दिया।
विकल्प A गलत है क्योंकि लक्ष्य से अधिक प्राप्ति दुर्लभ थी, अधिकांश योजनाएं कुल लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को अक्सर राजनीतिक और राजकोषीय घर्षण का सामना करना पड़ता था। विकल्प D गलत है क्योंकि राज्य-संचालित 'कमांड इकोनॉमी' को अक्सर निजी क्षेत्र से लाइसेंसिंग और विनियमन के संबंध में प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था।
B सही है — नौकरशाही में देरी, पर्याप्त घरेलू बचत की कमी, और सूखे व युद्ध जैसे अप्रत्याशित संकट योजना की सफलता में प्राथमिक बाधाएं थीं।
इसे 1991 के LPG सुधारों से जोड़ें, जो बाहरी झटकों को संभालने में नियोजित मॉडल की अक्षमता के कारण आवश्यक हो गए थे, जो राज्य-संचालित नियोजन से बाजार-उन्मुख उदारीकरण की ओर संक्रमण को चिह्नित करते हैं।