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सक्रि यता श्रेेणी में नीचे रखी गई धातुएं , जैसे कॉपर और मर्करी , किस प्रकार निष्कर्षित की जाती हैं ?
अधिक अभिक्रि याशील धातुओं का उपयोग करके विस्थाापन
उच्च तापमान पर कार्बन के साथ अपचयन
उनके पिघले हुए अयस्कोंों के विद्युत - अपघटन
सल्फााइड अयस्कोंों को ऑक्साइडों में बदलने के लिए वायु में भर्जन , उसके बाद गर्म करके
सल्फााइड अयस्कोंों को ऑक्साइडों में बदलने के लिए वायु में भर्जन , उसके बाद गर्म करके
सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुएं (जैसे कॉपर, मर्करी, सिल्वर) अत्यंत कम अभिक्रियाशील होती हैं। इनके ऑक्साइडों को केवल गर्म करने से ही अपचयित किया जा सकता है, जिसके लिए किसी कार्बन जैसे अपचायक की आवश्यकता नहीं होती है।
सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुएं (जैसे कॉपर, मर्करी, सिल्वर) अत्यंत कम अभिक्रियाशील होती हैं। इनके ऑक्साइडों को केवल गर्म करने से ही अपचयित किया जा सकता है, जिसके लिए किसी कार्बन जैसे अपचायक की आवश्यकता नहीं होती है।
यह वैसा ही है जैसे किसी ऐसे जिद्दी दाग को हटाना जिसके लिए किसी कठोर रसायन की जरूरत नहीं, बल्कि बस थोड़ा सा ताप देने पर वह खुद ही ढीला होकर निकल जाता है।
2HgS+3O2Δ2HgO+2SO2 — सिनेबार का भर्जन
2HgOΔ2Hg+O2 — तापीय अपघटन
मर्करी (पारा) मुख्य रूप से सिनेबार (HgS) अयस्क के रूप में पाया जाता है। सबसे पहले इसे वायु में गर्म करके (HgO) में परिवर्तित किया जाता है (भर्जन)। इसके बाद, प्राप्त HgO को और अधिक गर्म करने पर यह स्वतः विघटित होकर धात्विक मर्करी और ऑक्सीजन गैस में बदल जाता है। अभिक्रियाएं: 2HgS+3O2Δ2HgO+2SO2 और फिर 2HgOΔ2Hg+O2
सक्रियता श्रेणी में नीचे स्थित धातुएं प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी मिल सकती हैं।
इन धातुओं के ऑक्साइडों को केवल गर्म करने से शुद्ध धातु प्राप्त की जा सकती है।
भर्जन (Roasting) की प्रक्रिया मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है।
अत्यधिक अपचायकों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
ऊर्जा की बचत होती है क्योंकि ताप कम होता है।
पर्यावरण में सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं।
मर्करी निष्कर्षण (सिनेबार अयस्क से)
कॉपर निष्कर्षण (कॉपर ग्लान्स अयस्क से)
सक्रियता श्रेणी में नीचे वाली धातुओं को तापीय अपचयन (Thermal reduction) द्वारा प्राप्त किया जाता है।
ऑप्शन B मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं के लिए उपयुक्त है।
ऑप्शन C उच्च अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) के लिए उपयुक्त है।
D is correct — सल्फााइड अयस्कोंों को ऑक्साइडों में बदलने के लिए वायु में भर्जन , उसके बाद गर्म करके
परीक्षा में ध्यान रखें: सक्रियता श्रेणी के मध्य भाग के लिए कार्बन अपचयन, शीर्ष भाग के लिए विद्युत-अपघटन और निम्न भाग के लिए तापीय अपघटन का उपयोग होता है।