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एक व्यापारी प्रत्येक वस्तु को 24000 रुपये में बेचता है। उसे एक वस्तु पर 20% का लाभ होता है और दूसरी पर 20% की हानि होती है। उसका कुल लाभ या हानि प्रतिशत क्या है?
4% हानि
4% लाभ
2% हानि
न लाभ, न हानि
4% हानि
जब भी दो वस्तुओं का विक्रय मूल्य समान हो और लाभ व हानि प्रतिशत बराबर हों, तो पूरे सौदे में हमेशा हानि होती है, जो दर के वर्ग को 100 से भाग देने पर प्राप्त होती है।
प्रत्येक वस्तु का विक्रय मूल्य = 24000 रुपये, एक वस्तु पर लाभ = 20%, दूसरी पर हानि = 20%。
Loss%=(100x2)%
जब भी दो वस्तुओं का विक्रय मूल्य समान हो और लाभ व हानि प्रतिशत बराबर हों, तो पूरे सौदे में हमेशा हानि होती है, जो दर के वर्ग को 100 से भाग देने पर प्राप्त होती है।
छात्र अक्सर मान लेते हैं कि 20% लाभ और 20% हानि एक-दूसरे को काट देते हैं, जिससे परिणाम 0% होता है (न लाभ, न हानि)।
परिस्थिति की पहचान करें
चूंकि वस्तुएं समान मूल्य पर बेची जाती हैं और लाभ/हानि प्रतिशत संख्यात्मक रूप से समान हैं, हम शुद्ध प्रतिशत परिवर्तन सूत्र लागू करते हैं।
Net effect=(x+y+100xy)%
मान प्रतिस्थापित करें
यहाँ, x=+20 (लाभ) और y=−20 (हानि) है। इन मानों को सूत्र में रखने पर:
20−20+10020×(−20)
परिणाम की गणना करें
20 और −20 के पद एक-दूसरे को काट देते हैं, जिससे शेष गणना बचती है:
100−400=−4%
निष्कर्ष
ऋणात्मक चिह्न 4% की हानि दर्शाता है।
4% Loss
A सही है क्योंकि जब विक्रय मूल्य समान होते हैं और लाभ/हानि प्रतिशत समान होते हैं, तो परिणाम हमेशा x2/100 के रूप में हानि होती है, जो कि 202/100=4% है।
समान प्रतिशत लाभ और हानि से कुल हानि होने की यह अवधारणा 'क्रमागत प्रतिशत वृद्धि/कमी' के समान है, जिसका उपयोग चक्रवृद्धि ब्याज और जनसंख्या वृद्धि की समस्याओं में किया जाता है।