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घाटी वक्र (valley curve) निम्नलिखित में से किस स्थिति में बनता है?
A) ढलान (downgrade) के बाद चढ़ाव (upgrade)
B) ढलान के बाद दूसरी ढलान
C) समतल सतह के बाद चढ़ाव
D) उपर्युक्त सभी
उपर्युक्त सभी
घाटी वक्र (या सैग वक्र) दो ढालों (gradients) के अवतल या प्रतिच्छेदन पर प्रदान किया गया एक लंबवत वक्र होता है जहाँ उत्तलता नीचे की ओर होती है। यह तब बनता है जब विचलन कोण ऋणात्मक होता है, जो तब होता है जब ढलान (downgrade) के बाद चढ़ाव (upgrade) आता है, ढलान के बाद दूसरी हल्की ढलान आती है, या समतल/समतल सतह के बाद चढ़ाव आता है।
घाटी वक्र (या सैग वक्र) दो ढालों (gradients) के अवतल या प्रतिच्छेदन पर प्रदान किया गया एक लंबवत वक्र होता है जहाँ उत्तलता नीचे की ओर होती है। यह तब बनता है जब विचलन कोण ऋणात्मक होता है, जो तब होता है जब ढलान (downgrade) के बाद चढ़ाव (upgrade) आता है, ढलान के बाद दूसरी हल्की ढलान आती है, या समतल/समतल सतह के बाद चढ़ाव आता है।
N=n1−(−n2)=n1+n2 — ढलान के बाद चढ़ाव के लिए कुल विचलन कोण
L=1.5+0.035SNS2 — हेडलाइट दृष्टि दूरी (S<L) के लिए घाटी वक्र की लंबाई
L=2S−N1.5+0.035S — हेडलाइट दृष्टि दूरी (S>L) के लिए घाटी वक्र की लंबाई
L=2(CNv3)1/2 — आराम मानदंड पर आधारित घाटी वक्र की लंबाई
घाटी वक्रों को रात में ड्राइविंग के दौरान हेडलाइट दृष्टि दूरी (HSD) की आवश्यकताओं और सवार के आराम के आधार पर डिज़ाइन किया गया है। जब कोई वाहन सैग वक्र से गुजरता है, तो नीचे की ओर त्वरण गुरुत्वाकर्षण के समान दिशा में नीचे की ओर कार्य करने वाला एक अतिरिक्त अपकेंद्री बल (centrifugal force) उत्पन्न करता है, जिससे असुविधा को सीमित करने और दृष्टि दूरी को पूरा करने के लिए वक्र की लंबाई के सावधानीपूर्वक डिज़ाइन की आवश्यकता होती है।
घाटी वक्र नीचे की ओर उत्तलता प्रदर्शित करता है, जिसके कारण वक्रता केंद्र सड़क प्रोफाइल के ऊपर स्थित होता है।
शिखर वक्रों (summit curves) के विपरीत, जहाँ दिन के दौरान स्टॉपिंग दृष्टि दूरी (SSD) डिज़ाइन को नियंत्रित करती है, घाटी वक्र रात में हेडलाइट दृष्टि दूरी (HSD) द्वारा नियंत्रित होते हैं।
घाटी वक्रों के लिए सामान्यतः एक घनीय परवलय (y=ax3) को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह एक सुचारू संक्रमण (smooth transition) प्रदान करता है।
प्रतिच्छेदी ढालों के बीच सुचारू संक्रमण प्रदान करता है।
रात में ड्राइविंग के दौरान सुरक्षित हेडलाइट दृष्टि दूरी (HSD) सुनिश्चित करता है।
अपकेंद्री बलों के प्रभाव से होने वाली असुविधा को सीमित करता है।
जल जमाव को रोकने के लिए सबसे निचले बिंदु (सैग पॉइंट) पर उचित जल निकासी प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
गहरी घाटियों में मिट्टी की खुदाई के कारण निर्माण लागत अधिक होती है।
गड्डों, नदी पार करने के स्थानों और अंडरपासों पर राजमार्ग ज्यामितीय डिज़ाइन में उपयोग किया जाता है।
जहाँ भी उतरती हुई ढलान चढ़ती हुई ढलान या समतल ढाल में बदलती है, वहाँ लागू होता है।
मानक IRC विनिर्देश स्टॉपिंग दृष्टि दूरी (SSD) के बराबर हेडलाइट दृष्टि दूरी के लिए घाटी वक्रों को डिज़ाइन करने की सिफारिश करते हैं।
विकल्प A: ढलान के बाद चढ़ाव एक सैग (घाटी) वक्र बनाता है।
विकल्प B: तीव्र ढलान के बाद एक हल्की ढलान भी एक सैग (घाटी) वक्र बनाती है क्योंकि विचलन कोण N=−n1−(−n2)=−(n1−n2) ऋणात्मक होता है।
विकल्प C: एक समतल सतह (0%) के बाद चढ़ाव (+n2%) से विचलन कोण N=0−n2=−n2 प्राप्त होता है, जो घाटी वक्र बनाता है।
D सही है — सभी सूचीबद्ध ढाल संयोजन ऋणात्मक विचलन कोण के साथ नीचे की ओर उत्तलता उत्पन्न करते हैं, जिससे घाटी वक्र बनता है।
याद रखें: शिखर वक्र दिन के समय SSD/ओवरटेकिंग दृष्टि दूरी द्वारा शासित होते हैं, जबकि घाटी वक्र सख्ती से रात में हेडलाइट दृष्टि दूरी (HSD) और आराम के मानदंडों द्वारा शासित होते हैं।