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खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में से किसकी जनसंख्या सबसे अधिक होती है?
अपघटक (Decomposers)
प्राथमिक उपभोक्ता
उत्पादक
द्वितीयक उपभोक्ता
अपघटक (Decomposers)
अपघटक, जैसे बैक्टीरिया, कवक और एक्टिनोमाइसीट्स, खाद्य श्रृंखला में सबसे बड़ी जनसंख्या का निर्माण करते हैं क्योंकि वे सूक्ष्म होते हैं और कार्बनिक पदार्थों को कुशलतापूर्वक तोड़ने के लिए अत्यधिक संख्या में मौजूद होते हैं। जबकि पोषक स्तरों (उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक) में ऊपर जाने पर ऊर्जा आमतौर पर कम हो जाती है, अपघटकों की जैविक विविधता और संख्या यह सुनिश्चित करती है कि वे उच्चतम घनत्व बनाए रखें।
अपघटक, जैसे बैक्टीरिया, कवक और एक्टिनोमाइसीट्स, खाद्य श्रृंखला में सबसे बड़ी जनसंख्या का निर्माण करते हैं क्योंकि वे सूक्ष्म होते हैं और कार्बनिक पदार्थों को कुशलतापूर्वक तोड़ने के लिए अत्यधिक संख्या में मौजूद होते हैं। जबकि पोषक स्तरों (उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक) में ऊपर जाने पर ऊर्जा आमतौर पर कम हो जाती है, अपघटकों की जैविक विविधता और संख्या यह सुनिश्चित करती है कि वे उच्चतम घनत्व बनाए रखें।
एक अपार्टमेंट बिल्डिंग के बारे में सोचें: जबकि प्रति मंजिल केवल कुछ निवासी (उपभोक्ता) होते हैं, हर कमरे के कालीन के रेशों में खरबों धूल के कण और सूक्ष्म बैक्टीरिया (अपघटक) रह रहे होते हैं।
D.B.F. (Decomposers Break-down Fast - अपघटक तेजी से तोड़ते हैं) — याद रखें कि अपघटक पारिस्थितिकी तंत्र का 'आधार और मुख्य हिस्सा' होते हैं।
Energy Transfer=10% Law — दक्षता का नियम जहाँ केवल 10% ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुँचती है।
Net Primary Productivity(NPP)=Gross Primary Productivity−Respiration
अपघटक कार्बनिक मलबे को सरल अकार्बनिक पदार्थों में पचाने के लिए बाह्यकोशिकीय एंजाइमों का स्राव करके प्रकृति के पुनर्चक्रणकर्ता (recyclers) के रूप में कार्य करते हैं। यह प्रक्रिया पोषक तत्व चक्रण के सिद्धांत का पालन करती है, जहाँ द्रव्यमान संरक्षित रहता है लेकिन परिवर्तित हो जाता है। चूँकि वे अक्सर एककोशिकीय या सूक्ष्म जीव होते हैं, मिट्टी के एक ग्राम में अरबों व्यक्ति हो सकते हैं, जो उच्च पोषक स्तरों पर बड़े बहुकोशिकीय जीवों से कहीं अधिक होते हैं।
अपघटक हर पोषक स्तर पर एक अनूठी स्थिति रखते हैं, उत्पादकों या उपभोक्ताओं के विपरीत जो विशिष्ट निकेत (niches) तक सीमित होते हैं।
अपघटकों का जैवभार (biomass) महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उनकी संख्यात्मक जनसंख्या घनत्व किसी भी अन्य पोषक समूह से बेजोड़ है।
वे जटिल कार्बनिक यौगिकों को CO2, H2O और खनिजों में बदलने के लिए आवश्यक हैं।
पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण और मृदा उर्वरता सुनिश्चित करते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र में मृत कार्बनिक पदार्थों के संचय को रोकते हैं।
रोगजनक अपघटक संवेदनशील जीवों में जीवित ऊतकों के क्षय में योगदान कर सकते हैं।
कंपोस्टिंग प्रक्रियाओं के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन।
तेल रिसाव और प्रदूषित जल निकायों का जैव-उपचार (Bio-remediation)।
10% नियम (लिंडमैन का नियम) बताता है कि केवल 10% ऊर्जा ही प्रत्येक क्रमिक पोषक स्तर पर स्थानांतरित होती है, जो उपभोक्ता आबादी को सीमित करती है।
विकल्प B (प्राथमिक उपभोक्ता) उत्पादकों के उपलब्ध जैवभार द्वारा सीमित होते हैं।
विकल्प C (उत्पादक) आधार बनाते हैं लेकिन उनकी कुल संख्या अपघटकों की सूक्ष्मजीवी आबादी से कम होती है।
विकल्प D (द्वितीयक उपभोक्ता) हमेशा निचले पोषक स्तरों से ऊर्जा की उपलब्धता द्वारा सीमित होते हैं।
A सही है — अपघटक अपने सूक्ष्म स्वभाव और हर पोषक चरण पर कार्बनिक पदार्थों को तोड़ने की अपनी भूमिका के कारण एक पारिस्थितिकी तंत्र में सबसे बड़ी जनसंख्या बनाए रखते हैं।
हमेशा याद रखें कि 'संख्या के पारिस्थितिक पिरामिड' में, आधार आमतौर पर उत्पादक होते हैं, लेकिन यदि संख्यात्मक रूप से गिना जाए तो अपघटक अपने सूक्ष्म आकार के कारण अक्सर एक उल्टा या विशिष्ट उभार बनाते हैं।